साल नया है, ज़माना भी नया
है दिन नया, साल पुराना गया
ना हम बदले, तुम बदले क्या
सोच कर देखो फिर क्या है नया
नया है ये दिन, बीती रात गई
नई है आशा, कल की निराश गई
प्रेरणा है नई, उदासीनता वो गई
नया है जोश, थकान जो गई
संभव है, तोड़ लाएँ हम चाँद सितारे
भर दें खुशियां अनेक संसार में सारे
ऊर्जा आज जो है मन-बदन में हमारे
हिला कर रख दे शायद धरती पर्वत सारे
है दिन नया, साल पुराना गया
है प्रण नया, बंधन पुराना गया
मुकुल सरन 12/31/2025